Saturday, September 23, 2017

Niyati.. Destiny

 नियति ...

रास्तों पर निकलकर पहुँच जायेगा 
एक दिन मंजिल तक,
भटकने दो, राही की नियति में 
भटकना लिखा है. 
फडफडा कर थक जाएगा, पिंजरे का हो जाएगा
कुछ ही क्षणों में,
तड़पने दो, पंछी की नियति में 
छटपटाना लिखा है.

उड़ उड़ कर जा गिरेगा जलती ल़ो में
जल जाने दो, पतंगे की नियति में
सुलगना लिखा है.

सूख जाएँगे आंसू भी, बुझेगी जाने कब
मिलन की प्यास,
रो लेने दो, प्रेम की नियति में तड़पना लिखा है.

पोंछ डालो, मांग का सिन्दूर भी निकलेगा
हरजाई एक दिन,
टूट जाने दो, चूड़ियों की नियति में
बिखरना लिखा है.

                                                                      - जनार्दन साबत 'मुरली' 

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