Sunday, January 3, 2021

एक बार....  


चाँद तारे नहीं, पर जां दे सकते हैं , फरमाओ तो एक बार, 

बुरे इतने भी नहीं ,कसम से, पास आओ तो एक बार. 


उम्र की लकीरों को तज़ुर्बा नहीं , कमज़ोरी समझने वालों,

बाज़ुओं में नहीं ज़ुबां में हुनर है, आज़माओ तो एक बार. 


रिश्तों, जज़्बातों की उलझनों को, आसान  समझने वालों, 

पहेली है ज़िन्दगी का फलसफा भी, समझाओ तो एक बार. 


वो हंस दिया , मेरे लड़खड़ा कर गिरने पर, संभाल ही लेता, 

ज़ख्म पुराना  है, मगर ज़िंदा है , सहलाओ तो एक बार. 


अकेला पड़ गया है राह-ए -गर्दिश में ,  नाउम्मीद  हो गया है,

साँसे ज़िंदा हैं,  कोई दोस्तों को उसके, बुलाओ तो एक बार. 


- जनार्दन साबत 'मुरली'