ताज्जुब है...
शमा
को ज़माना जलना सिखा रहा है...।
ताउम्र लड़ा दर्द से बड़ी शिद्दत से जो दिल,
हरेक शख़्श आज उसको सम्भलना
सिखा रहा है ।
कुछ इस कदर भुलाता है वो अपनों की यादें,
मौत को ज़िंदगी समझना सिखा रहा है ।
जिनको हर लम्हा मैकशी का खुमार था,
बिन पिये आज हमको चलना सिखा रहा रहा है ।
वो अव्वल था वतन-परश्तों की गिनती में,
ताज्जुब है आज मौत से डरना सिखा रहा है ।
No comments:
Post a Comment
Please share your thoughts..