Thursday, September 11, 2014

Sahara Mil Gaya...

 
... ज़िंदगी को एक सहारा मिल गया !
 
उसकी आँखों का इशारा मिल गया,
ज़िंदगी को एक सहारा मिल गया।
 
यूं तो उनको भूलना मुमकिन नहीं,
याद को ताज़ा ठिकाना मिल गया ।
 
मुद्दतों से आस थी मंज़िल मिले,
डूबते को एक किनारा मिल गया ।
 
गैर का वो हमनशी बनकर जिये ,
मुफ़लिसी का एक बहाना मिल गया ।
 
लड़खड़ाते जाम संभले तो लगा,
मय को साक़ी एक पुराना मिल गया ।
 
फिर बहल जाएगा, है मासूम दिल,
आशिकी को फिर दीवाना मिल गया ।
 
-    जनार्दन साबत मुरली
 

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